किडाम्बि आच्चान्
श्री: श्रीमते शठकोपाय नमः श्रीमते रामानुजाय नमः श्रीमद्वरवर मुनये नमः श्री वानाचल महामुनये नमः जन्म नक्षत्र – चित्रा, हस्त अवतार स्थल – कांचीपुरम आचार्य – रामानुजाचार्य बचपन में उनका नाम “प्रणतार्तिहरर्” था. ( देवराज अष्टकम में स्वामी तिरुकच्ची नम्बि ने वरदराज स्वामी को बड़े सम्मान और प्यार से प्रणतार्तिहरर् कहके पुकारा.) उनको श्री रामानुजाचार्य / एम्बेरुमानार के मुख्य रसोइया बनाया गया … Read more